मुख्य विषय: बुद्धि, भाषा, सीखना, संवाद, लेन-देन, छोटी यात्रा
- स्वराशि
- मिथुन और कन्या
- पूरा चक्र
- लगभग 1 वर्ष (सूर्य से 28 अंश से अधिक दूर नहीं जाता)
- वक्री
- साल में 3 बार, हर बार लगभग 3 हफ़्ते
उच्च, नीच और कमज़ोर राशि: कन्या में उच्च का होता है, मीन में नीच का; धनु और मीन में स्वराशि के ठीक सामने होने से कमज़ोर रहता है (डिट्रिमेंट)।
बुध बताता है कि व्यक्ति कैसे सोचता और कैसे बोलता है। यह बुद्धि की मात्रा नहीं, उसका ढंग दिखाता है: कोई तेज़ और बिखरे ढंग से सोचता है, कोई धीमे और व्यवस्थित ढंग से।
बुध सूर्य से अधिकतम 28 अंश दूर जा सकता है। इसका मतलब है कि बुध या तो सूर्य वाली राशि में होता है या उसकी किसी पड़ोसी राशि में; कोई और विकल्प नहीं है। इसलिए बुध की राशि सूर्य राशि के ठीक बगल में रहकर उसमें एक हल्की-सी अलग रंगत जोड़ती है।
बुध सूर्य से पहले उदित होता है या बाद में, यह एक शास्त्रीय भेद है। सूर्य से पहले उदित बुध (भोर का तारा) तेज़ और साहसी बुद्धि के रूप में पढ़ा जाता है, और बाद में उदित बुध (साँझ का तारा) सावधान, बातों को पचाकर काम करने वाली बुद्धि के रूप में।
कुंडली में भाव
स्थित भाव: वह क्षेत्र जिसमें मन सबसे अधिक व्यस्त रहता है और सीखना सबसे आसानी से होता है।