मुख्य विषय: भावना, ज़रूरत, आदत, सुरक्षा, माँ
- स्वराशि
- कर्क
- पूरा चक्र
- 27.3 दिन (हर राशि में लगभग 2.5 दिन)
- वक्री
- कभी वक्री नहीं होता
उच्च, नीच और कमज़ोर राशि: वृषभ में उच्च का होता है, वृश्चिक में नीच का; मकर में स्वराशि के ठीक सामने होने से कमज़ोर रहता है (डिट्रिमेंट)।
चंद्रमा कुंडली का सबसे तेज़ चलने वाला पिंड है, और इसीलिए सबसे व्यक्तिगत भी। यह ढाई दिन में राशि बदल लेता है, इसलिए एक ही दिन जन्मे दो लोगों का चंद्रमा भी अलग हो सकता है। भारतीय ज्योतिष में जन्म राशि भी चंद्रमा की राशि से ही तय होती है।
यह विचार नहीं, ज़रूरत बताता है: सुरक्षित महसूस करने के लिए व्यक्ति को क्या चाहिए, तनाव में वह किस सहज प्रतिक्रिया से व्यवहार करता है, और ख़ुद को कैसे शांत करता है। सूर्य अगर बताता है कि व्यक्ति किस ओर जा रहा है, तो चंद्रमा बताता है कि वह कहाँ से आ रहा है।
शास्त्रीय ज्योतिष में चंद्रमा माँ और आरंभिक बचपन का भी कारक है। आधुनिक प्रयोग में इसे "भीतर उतर चुके देखभाल के ढंग" के रूप में पढ़ा जाता है: व्यक्ति ने ख़ुद की देखभाल करना किस तरह सीखा है।
जन्म का समय पता न हो तो सबसे अधिक असर चंद्रमा पर पड़ता है। अगर उस दिन उसने राशि बदली हो, तो दो अलग-अलग पाठ बनते हैं और दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल मेल नहीं खाते।
कुंडली में भाव
स्थित भाव: वह क्षेत्र जिसमें व्यक्ति भावनात्मक रूप से सबसे अधिक निवेश करता है।