मुख्य विषय: रूपांतरण, शक्ति, संकट, दबी हुई बातें, पुनर्जन्म
- स्वराशि
- वृश्चिक (आधुनिक)
- पूरा चक्र
- 248 वर्ष (हर राशि में 12 से 32 वर्ष)
- वक्री
- साल में एक बार, लगभग साढ़े पाँच महीने
उच्च, नीच और कमज़ोर राशि: शास्त्रीय गरिमा तालिका में इसका कोई स्थान नहीं है।
प्लूटो 1930 में खोजा गया और 2006 में खगोलविज्ञान में बौने ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया गया। इस वर्गीकरण ने इसके ज्योतिषीय उपयोग को नहीं बदला; ज्योतिष आकाशीय पिंडों को उनके द्रव्यमान से नहीं, उनके पारंपरिक अर्थ से बरतता है। वैदिक ज्योतिष में भी राहु और केतु भौतिक पिंड न होकर चंद्रमा की कक्षा के बिंदु हैं, फिर भी ग्रह गिने जाते हैं।
यह अपरिवर्तनीय रूपांतरण बताता है। प्लूटो जहाँ छूता है, वहाँ कुछ ख़त्म होता है और उसकी जगह कुछ और बनता है; बीच का कोई रास्ता नहीं होता। शक्ति, नियंत्रण, जुनून, और जो कुछ छिपाया या दबाया गया है, वह भी इसी दायरे में आता है।
इसकी कक्षा बहुत अंडाकार है, इसलिए यह हर राशि में बराबर समय नहीं रहता: वृश्चिक में बारह साल, वृषभ में इकतीस साल। इसी कारण इसका पीढ़ीगत प्रभाव अनियमित है।
कुंडली में भाव
स्थित भाव: वह क्षेत्र जहाँ संकट और नए सिरे से निर्माण से सबसे अधिक सामना होता है।