- भाव का प्रकार
- पणफर
- स्वाभाविक राशि / स्वामी
- वृषभ / शुक्र
मुख्य विषय: पैसा, संपत्ति, आय, आत्म-मूल्य, प्रतिभा, अपनी चीज़ें
दूसरा भाव उन चीज़ों के बारे में है जो व्यक्ति स्वयं कमाता है और जिनका वह मालिक है। पैसा इसका सबसे दिखने वाला हिस्सा है, पर अकेला हिस्सा नहीं: कौशल, संसाधन और अपने मूल्य का एहसास भी यहीं आते हैं।
शास्त्रीय ज्योतिष इस भाव को ठोस रूप में पढ़ता है: आय, चल संपत्ति, जीविका। आधुनिक ज्योतिष इसमें आत्म-मूल्य जोड़ता है और दोनों को आपस में जोड़ देता है; व्यक्ति ख़ुद को जितना मूल्यवान समझता है, उतना ही वह माँगता है।
भाव खाली हो तो
खाली हो तो दूसरे भाव के आरंभ पर पड़ी राशि के स्वामी, यानी द्वितीयेश, को देखा जाता है। इससे पता चलता है कि आय किस क्षेत्र से आती है।
अन्य भाव
- पहला भाव · स्वयं और बाहरी रूप
- तीसरा भाव · बुद्धि और निकट परिवेश
- चौथा भाव · जड़ें और घर
- पाँचवाँ भाव · सृजन और आनंद
- छठा भाव · काम और दिनचर्या
- सातवाँ भाव · साझेदारी
- आठवाँ भाव · साझा संसाधन और रूपांतरण
- नौवाँ भाव · अर्थ और दूर का संसार
- दसवाँ भाव · करियर और सार्वजनिक छवि
- ग्यारहवाँ भाव · समुदाय और भविष्य
- बारहवाँ भाव · एकांत और अवचेतन