- भाव का प्रकार
- आपोक्लिम
- स्वाभाविक राशि / स्वामी
- धनु / गुरु
मुख्य विषय: उच्च शिक्षा, आस्था, दर्शन, क़ानून, विदेश, लंबी यात्रा
नौवाँ भाव दुनिया को समझने की कोशिश का भाव है: दर्शन, आस्था-तंत्र, क़ानून, अकादमिक ज्ञान। तीसरे भाव में जानकारी जुटाई जाती है, नौवें में अर्थ गढ़ा जाता है।
लंबी यात्रा और विदेशी संस्कृति भी यहीं हैं। साझा बात दूरी है: भौगोलिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी, जाने-पहचाने दायरे से बाहर निकलना।
प्रकाशन, अध्यापन और मार्गदर्शन का काम इसी भाव से जुड़ता है, क्योंकि इन सबमें गढ़ा हुआ अर्थ दूसरों तक पहुँचाया जाता है।
भाव खाली हो तो
खाली हो तो इसका स्वामी बताता है कि अर्थ की खोज किस क्षेत्र से होकर गुज़रती है।
अन्य भाव
- पहला भाव · स्वयं और बाहरी रूप
- दूसरा भाव · धन और मूल्य
- तीसरा भाव · बुद्धि और निकट परिवेश
- चौथा भाव · जड़ें और घर
- पाँचवाँ भाव · सृजन और आनंद
- छठा भाव · काम और दिनचर्या
- सातवाँ भाव · साझेदारी
- आठवाँ भाव · साझा संसाधन और रूपांतरण
- दसवाँ भाव · करियर और सार्वजनिक छवि
- ग्यारहवाँ भाव · समुदाय और भविष्य
- बारहवाँ भाव · एकांत और अवचेतन