- भाव का प्रकार
- पणफर
- स्वाभाविक राशि / स्वामी
- सिंह / सूर्य
मुख्य विषय: संतान, प्रेम, खेल, कला, जोखिम, आत्म-अभिव्यक्ति
पाँचवाँ भाव वह सब बताता है जो व्यक्ति अपने भीतर से रचता है: संतान, कलाकृति, खेल, फ़्लर्ट, रचनात्मक काम। इन सबमें साझा बात यह है कि ये सब व्यक्ति की अपनी अभिव्यक्ति हैं।
शास्त्रीय ज्योतिष में यह संतान और आनंद का भाव है। आधुनिक पाठ में इसमें रचनात्मकता, शौक, रोमानी आकर्षण और जोखिम लेने की प्रवृत्ति भी जुड़ती है। जुआ और सट्टा भी यहीं आते हैं, क्योंकि दोनों एक तरह का खेल भी हैं और जोखिम भी।
सातवें भाव से इसका अंतर महत्वपूर्ण है: पाँचवाँ भाव प्रेम का रोमांच और अभिव्यक्ति वाला पक्ष है, सातवाँ भाव साझेदारी और प्रतिबद्धता वाला।
भाव खाली हो तो
इसके खाली होने का अर्थ यह नहीं कि रचनात्मकता नहीं होगी या संतान नहीं होगी; बस इसका संचालन किसी दूसरे क्षेत्र से होता है।
अन्य भाव
- पहला भाव · स्वयं और बाहरी रूप
- दूसरा भाव · धन और मूल्य
- तीसरा भाव · बुद्धि और निकट परिवेश
- चौथा भाव · जड़ें और घर
- छठा भाव · काम और दिनचर्या
- सातवाँ भाव · साझेदारी
- आठवाँ भाव · साझा संसाधन और रूपांतरण
- नौवाँ भाव · अर्थ और दूर का संसार
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- ग्यारहवाँ भाव · समुदाय और भविष्य
- बारहवाँ भाव · एकांत और अवचेतन