- भाव का प्रकार
- आपोक्लिम
- स्वाभाविक राशि / स्वामी
- मिथुन / बुध
मुख्य विषय: भाई-बहन, पड़ोसी, छोटी यात्राएँ, सीखना, रोज़मर्रा का संवाद
तीसरा भाव रोज़मर्रा की बुद्धि का भाव है: व्यक्ति कैसे सीखता है, कैसे बोलता है, जानकारी कैसे जुटाता और आगे पहुँचाता है। आसपास का परिवेश भी इसी में आता है, क्योंकि रोज़ का संवाद वहीं होता है।
भाई-बहन परंपरागत रूप से इसी भाव में आते हैं। आधुनिक प्रयोग में इसमें प्राथमिक स्कूल के दिनों में सीखने का ढंग, सोशल मीडिया और कम दूरी की आवाजाही भी जुड़ जाती है।
तीसरा और नौवाँ भाव मिलकर एक अक्ष बनाते हैं: तीसरा पास का, ठोस और टुकड़ों में बँटा ज्ञान दर्शाता है; नौवाँ दूर का, अमूर्त और समग्र ज्ञान।
भाव खाली हो तो
यह भाव अक्सर खाली होता है। इसका स्वामी बताता है कि सीखना और संवाद किस क्षेत्र में केंद्रित हैं।
अन्य भाव
- पहला भाव · स्वयं और बाहरी रूप
- दूसरा भाव · धन और मूल्य
- चौथा भाव · जड़ें और घर
- पाँचवाँ भाव · सृजन और आनंद
- छठा भाव · काम और दिनचर्या
- सातवाँ भाव · साझेदारी
- आठवाँ भाव · साझा संसाधन और रूपांतरण
- नौवाँ भाव · अर्थ और दूर का संसार
- दसवाँ भाव · करियर और सार्वजनिक छवि
- ग्यारहवाँ भाव · समुदाय और भविष्य
- बारहवाँ भाव · एकांत और अवचेतन